FIIs net sell ₹1,171 crore जबकि DIIs ने खरीदे ₹2,559 करोड़ – 1 दिसंबर की पूरी मार्केट रिपोर्ट
भारतीय शेयर बाजार ने दिसंबर की शुरुआत मिले -जुले अंदाज़ में की। जहां एक तरफ विदेशी निवेशक यानी FIIs (Foreign Institutional Investors) ने फिर से भारी बिकवाली की, वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों — DIIs (Domestic Institutional Investors) — ने बाजार को सहारा देते हुए ज़बरदस्त खरीदारी की।
1 दिसंबर 2025 के सेशन में FIIs ने ₹1,171 करोड़ की नेट बिकवाली की, जबकि DIIs ने ₹2,559 करोड़ की नेट खरीदारी की। सालभर की बात करें तो अब तक FIIs ने ₹2.59 लाख करोड़ की भारी बिकवाली की है, जबकि DIIs ने ₹7.08 लाख करोड़ की मजबूत खरीदारी के साथ बाजार को संभाले रखा है।
बाज़ार का हाल: सेंसेक्स-निफ्टी दोनों रहे दबाव में
1 दिसंबर के ट्रेडिंग सेशन में हल्का दबाव देखने को मिला। दिन की शुरुआत थोड़ी मजबूती के साथ हुई थी, लेकिन बाद में विदेशी बिकवाली और कमजोर ग्लोबल संकेतों ने बाजार को नीचे धकेल दिया।
👉 Closing Levels:
- सेंसेक्स: -64.77 अंक (0.08% गिरावट) पर 85,641.90
- निफ्टी 50: -27.20 अंक (0.10% गिरावट) पर 26,175.75
- BSE Midcap & Smallcap: फ्लैट बंद
निफ्टी बैंक ने इंट्राडे में पहली बार 60,000 का स्तर पार किया, लेकिन क्लोजिंग में हल्की गिरावट के साथ 59,681.35 पर बंद हुआ।
Nifty Midcap 100 ने भी दिन के दौरान रिकॉर्ड हाई 61,311.25 को छुआ, लेकिन क्लोजिंग फ्लैट ही रही।
यह साफ दिखाता है कि बाजार में तेजी थी, लेकिन ऊपरी स्तरों पर प्रॉफिट बुकिंग हावी रही।
FIIs vs DIIs: किसका पलड़ा भारी?
FIIs की पोज़िशन:
- खरीद: ₹8,979 करोड़
- बिक्री: ₹10,151 करोड़
- नेट सेलिंग: ₹1,171 करोड़
DIIs की पोज़िशन:
- खरीद: ₹13,025 करोड़
- बिक्री: ₹10,466 करोड़
- नेट बाइंग: ₹2,559 करोड़
स्पष्ट है कि विदेशी निवेशक सतर्क हैं, शायद मौजूदा वैल्यूएशन उन्हें ऊंचे लग रहे हैं। वहीं घरेलू निवेशक अभी भी भरोसे के साथ भारतीय इक्विटी में पैसा लगा रहे हैं।
कौन से सेक्टर चढ़े और कौन गिरे?
गैनर्स (0.3% – 0.5% ऊपर)
- Auto
- IT
- PSU Bank
- Metal
लूज़र्स
- Realty: -1%
- Consumer Durables: -0.5%
- Pharma: -0.5%
ऑटो और PSU बैंक सेक्टर में खरीदारी जारी रही, जबकि रियल्टी और फार्मा पर बिकवाली का दबाव रहा।
आज के टॉप Nifty Losers
- InterGlobe Aviation
- Bajaj Finance
- Max Healthcare
- Sun Pharma
- Trent
आज के टॉप Gainers
- Adani Ports
- Tata Motors PV
- Kotak Mahindra Bank
- Eicher Motors
मार्केट एक्सपर्ट की राय: क्यों टूटा बाजार?
Vikram Kasat, Head Advisory, PL Capital के अनुसार:
- बाजार में शुरुआत में तेजी थी लेकिन रिकॉर्ड हाई के बाद निवेशकों ने प्रॉफिट-बुकिंग की।
- रुपये के ऑल-टाइम लो पर पहुंचने से भी सेंटिमेंट कमजोर हुआ।
- ग्लोबल मार्केट्स से भी कोई बड़ा पॉजिटिव ट्रिगर नहीं आया।
- इस सप्ताह आने वाले मैक्रो डेटा और सेंट्रल बैंक की टिप्पणियों पर बाजार की नजर रहेगी।
उनके अनुसार, बाजार आने वाले कुछ सत्रों में कंसोलिडेशन मोड में रह सकता है।
सालभर का निवेश ट्रेंड (2025)
FIIs (Foreign Investors):
- ₹2.59 लाख करोड़ की नेट बिकवाली
- कारण:
- ग्लोबल बॉन्ड यील्ड का बढ़ना
- डॉलर इंडेक्स मजबूत
- उभरते बाजारों में जोखिम कम करने की रणनीति
DIIs (Domestic Investors):
- ₹7.08 लाख करोड़ की नेट खरीदारी
- कारण:
- भारतीय आर्थिक वृद्धि की मजबूत उम्मीद
- लोकल SIP और MF इंफ्लो रिकॉर्ड स्तर पर
- इक्विटी बाजार में घरेलू विश्वास
यही कारण है कि FIIs की बिकवाली के बावजूद बाजार नई ऊँचाइयाँ छू रहा है—DII की मजबूत पकड़ इसकी सबसे बड़ी वजह है।
आगे क्या? मार्केट का आउटलुक
निकट भविष्य में बाजार में ये 4 चीजें अहम रहेंगी:
1 रुपये की कमजोरी
डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर होता रुपया विदेशी निवेशकों को सतर्क कर रहा है।
2 ग्लोबल मार्केट्स का ट्रेंड
अमेरिकी फेड की ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता का असर भारतीय बाजार पर भी दिखेगा।
3 तेजी से बढ़ती वैल्यूएशन
मिडकैप और स्मॉलकैप बबल जैसी स्थिति की चिंता निवेशकों को प्रॉफिट बुकिंग की ओर धकेल रही है।
4 कंसोलिडेशन फेज
रिकॉर्ड हाई के बाद आमतौर पर बाजार थोड़ा ठहरता है—यह वही फेज है।
निष्कर्ष: DIIs ने संभाला मोर्चा, बाजार में रहेगा उतार-चढ़ाव
1 दिसंबर का पूरा डेटा एक चीज साफ करता है —
भारतीय बाजार फिलहाल विदेशी निवेशकों पर नहीं, बल्कि घरेलू निवेशकों के दम पर खड़ा है।
FIIs की बिकवाली चिंता जरूर है, लेकिन DIIs की मजबूत खरीदारी बाजार को गिरने नहीं दे रही।
निकट भविष्य में बाजार में उतार-चढ़ाव रहेगा, लेकिन लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह अवसरों से भरा समय हो सकता है।
Disclaimer
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