2026 में सोना-चांदी का धमाका: Gold $4563, Silver $83 के रिकॉर्ड पर

2026 की शुरुआत ही बुलियन मार्केट के लिए ऐतिहासिक साबित हो रही है। साल के पहले ही महीने में सोना और चांदी ने नए ऑल-टाइम हाई छू लिए हैं। वैश्विक अनिश्चितता, जियोपॉलिटिकल टेंशन और अमेरिका में ब्याज दर कटौती की उम्मीदों ने निवेशकों को सुरक्षित विकल्पों की ओर मोड़ दिया है।

सोना: पहली बार $4,563 प्रति औंस के पार

12 जनवरी 2026 को स्पॉट गोल्ड 1% से ज्यादा उछलकर $4,563.61 प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। यह 2026 का पहला रिकॉर्ड हाई है।
निवेशक जोखिम भरे एसेट्स से निकलकर सेफ-हेवन यानी गोल्ड की ओर शिफ्ट होते दिखे।

चांदी ने भी रचा इतिहास

सोने के साथ-साथ चांदी भी $83.50 प्रति औंस के नए रिकॉर्ड पर पहुंच गई।
चांदी की मजबूती के पीछे दो बड़े कारण हैं:

  • मजबूत निवेश मांग
  • इंडस्ट्रियल डिमांड (खासकर एनर्जी ट्रांजिशन और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर)

तेजी के पीछे मुख्य वजहें

1 जियोपॉलिटिकल रिस्क

  • अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट में डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी पर आने वाला फैसला
  • वैश्विक तनाव और अनिश्चितता

2 US Fed Rate Cut की उम्मीद

  • बाजार को उम्मीद है कि US Federal Reserve 2026 में ब्याज दरें घटा सकता है, जिससे सोना-चांदी जैसे नॉन-इंटरेस्ट एसेट्स को फायदा मिलता है।

3 ETF में मजबूत निवेश

  • गोल्ड और सिल्वर ETFs में लगातार इनफ्लो
  • निवेशक पोर्टफोलियो को हेज करने के लिए बुलियन को प्राथमिकता दे रहे हैं।

एक्सपर्ट्स क्या कह रहे हैं?

प्रणव मेर (JM Financial Services)

“बुलियन मार्केट में पॉजिटिव मोमेंटम बना रहेगा। किसी भी करेक्शन को खरीदारी का मौका माना जाना चाहिए।”

प्रथेमेश मल्ल्या (Angel One)

“वोलैटिलिटी के बावजूद गोल्ड-सिल्वर का ओवरऑल ट्रेंड अब भी बुलिश है।”

🇮🇳 भारत में संभावित टारगेट

  • सोना: ₹1.41 लाख प्रति 10 ग्राम (शॉर्ट टर्म)
  • चांदी: ₹2.80 लाख से ₹3 लाख प्रति किलोग्राम (मीडियम टर्म)

आगे क्या देखें निवेशक?

इस हफ्ते बाजार की नजर रहेगी:

  • US, भारत और जर्मनी के महंगाई (Inflation) डेटा
  • चीन के ट्रेड और निवेश आंकड़े
  • US Fed अधिकारियों के बयान
  • US Supreme Court का टैरिफ पर फैसला

इन सभी फैक्टर्स का सीधा असर गोल्ड-सिल्वर की कीमतों पर पड़ सकता है।


2026 में भी मजबूत रहेगा बुलियन?

Motilal Oswal की Commodities Outlook 2026 रिपोर्ट के मुताबिक:

  • सोना: सेंट्रल बैंकों की लगातार खरीद से मजबूत सपोर्ट
  • चांदी: सप्लाई डेफिसिट + ग्रीन एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर डिमांड

यानी 2026 में भी सोना-चांदी स्ट्रक्चरल रूप से मजबूत बने रह सकते हैं।


निष्कर्ष

अगर वैश्विक अनिश्चितता और ब्याज दरों में नरमी का माहौल बना रहता है, तो सोना और चांदी निवेशकों के लिए सेफ-हेवन बने रहेंगे
लॉन्ग-टर्म निवेशक के लिए हर गिरावट एक अवसर हो सकती है।