निफ्टी ऑल टाइम हाई लेकिन पोर्टफोलियो डाउन क्यों?

पिछले कुछ हफ्तों से लगातार खबरें आ रही हैं कि निफ्टी, सेंसेक्स और बैंक निफ्टी ऑल टाइम हाई पर पहुंच गए हैं। लेकिन जैसे ही रिटेल निवेशक अपना पोर्टफोलियो खोलता है, मायूसी हाथ लगती है। न पोर्टफोलियो ऑल टाइम हाई पर है, न ही संतोषजनक रिटर्न दिख रहा है।

तो सवाल बिल्कुल जायज़ है — जब बाजार रिकॉर्ड बना रहा है, तब हमारा पोर्टफोलियो पीछे क्यों रह गया? क्या हमारे निवेश में कोई गलती है? क्या शेयर बेचने चाहिए या इंतजार करना चाहिए?

इस ब्लॉग में हम इन्हीं सवालों का जवाब आसान भाषा में, एक्सपर्ट्स की राय और डेटा के साथ समझेंगे।


निफ्टी ऑल टाइम हाई और पोर्टफोलियो डाउन – विरोधाभास क्यों?

सबसे पहले यह समझना ज़रूरी है कि निफ्टी या सेंसेक्स पूरे बाजार का प्रतिबिंब नहीं होते। निफ्टी 50 में सिर्फ 50 कंपनियां होती हैं और उनमें से भी:

  • 5–6 बड़ी कंपनियां
  • 60–70% मूवमेंट को कंट्रोल करती हैं

यानी अगर कुछ चुनिंदा लार्जकैप स्टॉक्स ऊपर जा रहे हैं, तो भी इंडेक्स ऑल टाइम हाई दिख सकता है — जबकि बाकी 70–80% शेयर गिर रहे हों।

इसी को कहते हैं Narrow Rally (संकीर्ण तेजी)


Market Breadth कमजोर क्यों है?

Market Breadth का मतलब होता है — कितने शेयर बढ़ रहे हैं बनाम कितने गिर रहे हैं।

वर्तमान स्थिति में:

  • इंडेक्स ऊपर है
  • लेकिन अधिकांश स्मॉलकैप और मिडकैप शेयर नीचे हैं

यही कारण है कि रिटेल निवेशकों का पोर्टफोलियो दबाव में है, क्योंकि:

  • अधिकतर रिटेल निवेशक स्मॉलकैप–मिडकैप में ज्यादा निवेश करते हैं
  • वहीं निफ्टी को खींचने वाले लार्जकैप में उनकी हिस्सेदारी कम होती है

2020–2024 का स्मॉलकैप बूम अब क्यों थमा?

2020 से 2024 तक:

  • स्मॉलकैप और मिडकैप ने असाधारण रिटर्न दिए
  • कई शेयर 30–40 PE तक पहुंच गए

लेकिन अब:

  • अर्निंग ग्रोथ स्लो हो रही है
  • वैल्यूएशन अब भी ऊंची है
  • जैसे ही बाजार में अनिश्चितता आई, सबसे पहले स्मॉलकैप गिरे

इतिहास गवाह है — हर स्लोडाउन में स्मॉल और मिडकैप सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं


Fund Rotation: पैसा कहां जा रहा है?

यह कोई क्रैश नहीं, बल्कि Fund Rotation है।

अभी पैसा:

  • ओवरवैल्यूड स्मॉलकैप से निकलकर
  • सेफ और स्टेबल लार्जकैप (बैंकिंग, ऑटो, रिलायंस जैसे स्टॉक्स) में जा रहा है

इसी वजह से:

  • निफ्टी मजबूत दिख रहा है
  • लेकिन पोर्टफोलियो कमजोर

FII Selling और DII Buying का असर

  • विदेशी निवेशक (FII) लगातार बिकवाली कर रहे हैं
  • घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) SIP के पैसों से खरीद रहे हैं

लेकिन DII:

  • रिस्क नहीं लेना चाहते
  • इसलिए वही लार्जकैप चुनते हैं जहां गिरावट सीमित हो

नतीजा:

  • लार्जकैप टिके हुए
  • स्मॉलकैप दबाव में

IPOs और नए निवेश विकल्प

हाल के महीनों में:

  • बड़े-बड़े IPO आए
  • निवेशकों का पैसा वहीं अटक गया

इसके अलावा:

  • गोल्ड और सिल्वर ने शानदार रिटर्न दिए
  • जिससे निवेशकों का ध्यान इक्विटी से बंटा

हालांकि रिटेल गोल्ड में बहुत ज्यादा नहीं गया, लेकिन फोकस जरूर शिफ्ट हुआ


क्या यह मार्केट रैली असली है?

यह पूरी मार्केट की रैली नहीं है।

यह है:

  • चुनिंदा कंपनियों की तेजी
  • Defensive और Catch-up Rally

ऐसी रैली में:

  • इंडेक्स चमकता है
  • लेकिन आम निवेशक निराश होता है

अब रिटेल निवेशक क्या करें?

1 सिर्फ प्राइस देखकर शेयर न बेचें

अगर कंपनी की:

  • अर्निंग ठीक है
  • बिजनेस मजबूत है

तो सिर्फ गिरते दाम देखकर बेच देना सबसे बड़ी गलती होती है।

2 फंडामेंटल खराब हो तो ही बाहर निकलें

शेयर बेचने का सही कारण:

  • अर्निंग गाइडेंस फेल
  • बिजनेस मॉडल कमजोर
  • कर्ज बढ़ता जा रहा हो

3 पोर्टफोलियो में सेक्टर बैलेंस देखें

अगर आपके पोर्टफोलियो में:

  • बैंकिंग
  • ऑटो
  • बड़े लार्जकैप

का एक्सपोजर बहुत कम है, तो अंडरपरफॉर्मेंस स्वाभाविक है।

4 धैर्य ही असली हथियार है

मार्केट:

  • हर 3–6 महीने में रंग बदलता है
  • आज जो सेक्टर दबाव में है, वही कल लीडर बन सकता है

क्या अभी पोर्टफोलियो रोटेट करना चाहिए?

  • अंधाधुंध शफलिंग नहीं
  • SIP चालू रखें
  • क्वालिटी स्टॉक्स पर भरोसा रखें

याद रखें —

मार्केट मौका देता है, लेकिन उस वक्त वह मौका खतरे जैसा दिखता है।


निष्कर्ष

निफ्टी ऑल टाइम हाई है, लेकिन आपका पोर्टफोलियो डाउन है — इसका मतलब यह नहीं कि आप गलत निवेशक हैं।

यह दौर है:

  • Narrow Rally का
  • Fund Rotation का
  • धैर्य की परीक्षा का

जो निवेशक:

  • फंडामेंटल पर टिके रहते हैं
  • घबराकर फैसले नहीं लेते

वही अगले फेज में सबसे ज्यादा फायदा उठाते हैं।


अगर आपको यह विश्लेषण उपयोगी लगा हो, तो इसे शेयर करें और ऐसे ही निवेश से जुड़े आसान विश्लेषण के लिए जुड़े रहें।

Comments are closed.