भारत के प्रमुख एक्सचेंज National Stock Exchange ने इंडेक्स डेरिवेटिव्स में बड़ा अपडेट जारी किया है। दिसंबर 2025 की एक्सपायरी के बाद कई प्रमुख इंडेक्स के market lot size को कम किया जाएगा। इसका सीधा प्रभाव रिटेल ट्रेडर्स, ऑप्शंस राइटर्स और हेजिंग करने वाले निवेशकों पर पड़ने वाला है।
🔍 क्या बदलेगा? — नए Lot Size (दिसंबर 2025 के बाद)
| इंडेक्स | पुराना Lot Size | नया Lot Size |
|---|---|---|
| Nifty 50 | 75 | 65 |
| Nifty Bank | 35 | 30 |
| Nifty Financial Services | 65 | 60 |
| Nifty Midcap Select | 140 | 120 |
| Nifty Next 50 | No Change | No Change |
नए Lot Size कब से लागू होंगे?
साप्ताहिक (Weekly) Contracts
- आखिरी Weekly expiry पुराना lot size: 23 दिसंबर 2025
- पहली Weekly expiry नया lot size: 6 जनवरी 2026
मासिक (Monthly) Contracts
- आखिरी Monthly expiry पुराना lot size: 30 दिसंबर 2025
- पहली Monthly expiry नया lot size: 27 जनवरी 2026
Quarterly / Half-Yearly Contracts
- 30 दिसंबर 2025 के EoD से नया lot size लागू।
मार्च 2026 Contract में क्या बदलाव?
- मार्च 2026 कॉन्ट्रैक्ट, जो पहले Quarterly माना जाता था,
अब Far-Month Contract माना जाएगा — दिसंबर 2025 Monthly expiry के बाद से।
बदलाव क्यों किए जाते हैं?
NSE समय-समय पर lot size को बदलता है ताकि—
- कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू SEBI की गाइडलाइन के भीतर रहे,
- रिटेल निवेशकों के लिए एंट्री आसान हो,
- मार्केट में liquidity बैलेंस्ड रहे।
इन बदलावों का असर किस पर पड़ेगा?
रिटेल ट्रेडर्स
कम lot size का मतलब ऑप्शन बायिंग व सेलिंग दोनों में कम पूंजी की ज़रूरत।
ऑप्शन राइटर्स
मार्जिन थोड़ा कम होगा, लेकिन
ROI कैलकुलेशन बदल जाएगा — क्योंकि प्रीमियम भी proportional घटेगा।
हेजर्स
पोर्टफोलियो hedge करना सस्ता होगा — खासकर Nifty और Bank Nifty में।
निष्कर्ष (Conclusion)
दिसंबर 2025 एक्सपायरी के बाद से सभी प्रमुख इंडेक्स डेरिवेटिव्स में नया बदलाव लागू होगा।
कम lot size के कारण participation बढ़ने की संभावना है।
रिटेल ट्रेडर्स को यह बदलाव फायदेमंद लग सकता है क्योंकि पूंजी की बाधा घटेगी।
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