Gold Price Crash: धड़ाम होकर गिरा सोने का दाम — क्यों लगातार हो रहा है सस्ता?

Gold Price Crash: लगातार तीसरे दिन गिरा सोना-चांदी का दाम

भारत में सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट जारी है। मंगलवार, 18 नवंबर 2025 को Gold Silver Price Today के मुताबिक सोना लगातार तीसरे दिन धड़ाम होकर नीचे आया है।
अमेरिकी फेडरल रिज़र्व द्वारा दिसंबर में रेट कट की उम्मीदों के लगभग खत्म होने और डॉलर के मजबूत होने से गोल्ड-सिल्वर पर भारी प्रेशर देखने को मिला है।

  • MCX Gold December Futures: 1.47% गिरकर ₹1.21 लाख प्रति 10 ग्राम
  • MCX Silver December Futures: 2.36% गिरकर ₹1.51 लाख प्रति किलो
  • मार्च 2026 सिल्वर कॉन्ट्रैक्ट भी ₹1.54 लाख प्रति किलो पर फिसला

विश्लेषकों का कहना है कि बाजार में सकारात्मक संकेतों की कमी और ऊँचे स्तरों पर कमजोर खरीदारी ने सोने के बुल्स को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया है।


क्यों गिर रहे हैं Gold–Silver के दाम?

सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट किसी एक कारण से नहीं हुई है। इसके पीछे फेड नीति, डॉलर इंडेक्स, ग्लोबल आउटलुक, घरेलू मांग—इन सभी का सीधा खेल है। आइए कारण समझते हैं:

1. फेडरल रिज़र्व के रेट कट की उम्मीदें कम हुईं

बाजार को उम्मीद थी कि दिसंबर में फेड रेट कट करेगा, लेकिन ताज़ा बयान इस उम्मीद के खिलाफ गए हैं।

  • फेड अधिकारियों ने संकेत दिया कि
    “नीतिगत ढील (Rate Cut) जल्दबाज़ी में नहीं होगी।”
  • फेड वाइस चेयर फिलिप जेफरसन ने कहा कि नीति में ढिलाई पर “धीमी और सावधान रणनीति” अपनाई जाएगी।

इसका असर:
रेट कट कम होने का मतलब—डॉलर मजबूत, गोल्ड कमजोर।


2. डॉलर इंडेक्स मजबूत हुआ — गोल्ड पर दबाव बढ़ा

गोल्ड और डॉलर का रिश्ता उल्टा चलता है।
डॉलर मजबूत → सोना महंगा लगता है → निवेशक खरीदारी कम करते हैं → कीमत गिरती है।

बीते कुछ दिनों में Dollar Index में मजबूती ने सोने को और नीचे धकेल दिया।

3. ग्लोबल मार्केट में भी भारी गिरावट

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना बुरी तरह टूटा है।

  • COMEX Gold December Contract: 1.60% गिरकर $4009.5 प्रति औंस
  • पिछले 4 सेशंस में COMEX गोल्ड $204 गिर चुका है
  • सिल्वर भी $50.71 से फिसलकर $49.50 प्रति औंस पर

Global weakness = Indian market में और दबाव।


4. घरेलू मांग में कमी — त्योहारों के बाद ठंडा बाजार

भारत में त्योहार और शादी के सीजन के बाद गोल्ड की खरीदारी स्वभाविक रूप से कम हो जाती है।

  • IBJA उपाध्यक्ष अक्ष ए कंबोज ने कहा कि
    “मांग सामान्य हो रही है, इसलिए कीमतों में गिरावट स्वाभाविक है।”

कम मांग = कम सपोर्ट = कीमत नीचे।

5. गोल्ड इम्पोर्ट में भारी उछाल — ट्रेड डेफिसिट बढ़ा

अक्टूबर में भारत का गोल्ड इम्पोर्ट तीन गुना बढ़कर $14.72 बिलियन हो गया।
अप्रैल–अक्टूबर कुल इम्पोर्ट 21% बढ़कर $41.23 बिलियन

इतनी बड़ी मात्रा में इम्पोर्ट से—

  • घरेलू सप्लाई बढ़ती है
  • कीमतों में प्राकृतिक दबाव आता है

साथ ही ट्रेड डेफिसिट $41.68 बिलियन पहुंच गया है, जो रुपए और आर्थिक सिस्टम पर तनाव बनाता है।

विश्लेषक क्या कह रहे हैं? (Expert View on Gold Price)

राहुल कलंत्री,

“सोना-चांदी अभी भी दवाब में है क्योंकि बाजार में पॉजिटिव संकेत नहीं मिल रहे। ऊँचे स्तरों पर खरीदार कमज़ोर हैं और बुल्स अभी सतर्क मोड में हैं।”

जिगर त्रिवेदी, रिलायंस सिक्योरिटीज

“पिछले 6 हफ्तों से कोई बड़ा आर्थिक डेटा नहीं आया, और फेड के सख्त बयानों से रेट कट की उम्मीदें कम होती जा रही हैं। इसका सीधा असर सोने की कीमतों पर पड़ रहा है।”

क्या गिरावट जारी रहेगी? (Gold Price Next Trend)

वर्तमान स्थिति के आधार पर ट्रेंड इस समय Bearish to Sideways माना जा रहा है।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि:

  • बहुत ज्यादा गिरावट पर खरीदारी आ सकती है
  • यह Correction लंबी अवधि निवेशकों के लिए “धीरे-धीरे खरीदने” का मौका बन सकता है
  • लेकिन अल्पकाल में प्रेशर बना रह सकता है

MCX में ₹1.20 लाख–₹1.19 लाख एक मजबूत सपोर्ट ज़ोन माना जा रहा है।

निवेशकों के लिए टिप्स (News Tip Style)

1. पैनिक में बिकवाली न करें

सोना एक लॉन्ग-टर्म सुरक्षित एसेट है—ट्रेंड नीचे जाए तो Panic Sell से नुकसान बढ़ता है।

2. धीरे-धीरे खरीदारी का मौका

कम कीमतों पर SIP या स्टेज-बेस्ड Buying फायदेमंद रहती है।

3. ग्लोबल डेटा पर नज़र रखें

आने वाले हफ्तों में US CPI, Jobs Data और फेड स्टेटमेंट—सोने का बड़ा ट्रिगर होंगे।

4. सिल्वर में वोलैटिलिटी ज्यादा

Silver high-beta metal है—Risk Management जरूरी।

5. MCX ट्रेडर्स SL जरूर रखें

तकनीकी स्तर नीचे हैं—SL के बिना ट्रेड = बड़ा जोखिम।

निष्कर्ष: Gold Price Crash जारी, लेकिन निवेशकों के लिए अवसर भी

सोने-चांदी की लगातार कमजोरी के पीछे डॉलर की मजबूती, फेड की सख्त नीति, घरेलू मांग में कमी और ग्लोबल कमजोरी—ये चार मुख्य कारण हैं।
भले ही शॉर्ट-टर्म में कीमत दबाव में रहे, लेकिन विशेषज्ञ इसे स्टेज-बेस्ड खरीदारी का मौका मान रहे हैं।

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